" रेत पर उकेरे जो शब्द" का विमोचन एवं लोकार्पण

# 01 Apr, 2026

बिलासपुर के साहित्यिक परिवेश में सीएमपीडीआई, बिलासपुर के सामुदायिक भवन में एक उल्लेखनीय आयोजन संभव हुआ। इस अवसर पर सुविख्यात कलमकार सतीश जायसवाल के करकमलों द्वारा बिलासपुर के छिपे हुए कवि अजीत सिंह गौर के सद्यः प्रकाशित काव्य संग्रह " रेत पर उकेरे जो शब्द" का विमोचन एवं लोकार्पण हुआ।

विमोचन के अवसर पर सतीश जायसवाल मुख्य अतिथि के उद्गारों एवं प्रसिद्ध समालोचक और कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ जयप्रकाश,दुर्ग के उद्बोधन का उपस्थित गणजनों द्वारा करतल ध्वनि से स्वागत और अनुमोदन किया गया। पूरा ही आयोजन बहु स्तरीय था। इसमें विमोचन के बाद , शहर के प्रतिभा-युगल यथा अपने एवरेस्ट पर्वतारोहण अभियान से सबको चकित करने वाली डॉ दीप्ति मिश्रा लाड़ीकर की प्रकृतिप्रेम की पेंटिंग तथा डॉ कपिल मिश्रा जो पर्यावरण की गहरी समझ रखते हैं,उनके प्रवासी व अन्य पक्षियों के फोटोग्राफ की प्रदर्शनी का उपस्थित सुधीजनों ने निरीक्षण किया और सराहा। इसके पश्चात न्यायधानी के नवगीत के शिखर पुरुष डॉ अजय पाठक की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ,जिसमें अंतरराष्ट्रीय तौर पर विख्यात नीरज मनजीत , कवर्धा, महासमुंद के कवि और गजलकार श्री अशोक शर्मा, शहर के कवि दलजीत सिंह ,दिल्ली के पद्मनाभ मिश्र और अध्यक्ष ने अपनी रचनाओं से विद्वान श्रोताओं को आनंदित किया। सर्वाधिक उल्लेखनीय यह रहा कि कार्यक्रम की शोभा व भव्यता को उस समय चार चांद लग गए, जब किसी अन्य कार्यक्रम के सिलसिले में शहर आईं बिरजू महाराज की शिष्या और अंतराष्ट्रीय ख्यातनाम कत्थक नृत्यांगना विद्या हरि देशपांडे ने अपनी उपस्थिति से विमोचन प्रसंग को गौरवान्वित एवं धन्य किया। इस अवसर पर उनका अभिनंदन व सम्मान भी किया गया। अंत में मुंबई की सुरसिद्ध गायिका गुरशीत खनूजा और उनके पिता ने अपने गीतों व गजलों की महफिल सजाई, जिससे विद्वान श्रोतागण झूम- झूम गए। कार्यक्रम का कुशल निदेशन और संचालन सुप्रिया भारतीयन द्वारा किया गया, जिसके लालित्य और समयबद्धता की सभी ने सराहना की। कार्यक्रम में डॉ अजय श्रीवास्तव ,डॉ अंकुर शुक्ल और डॉ जीवन जायसवाल का विशेष सहयोग रहा।

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